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संत रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था. संत रहीम की माता का नाम सुल्ताना बेगम और पिता का नाम बैरम खान था. उनका जन्म 17 दिसम्बर, 1556 को लाहौर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. मुस्लिम परिवार में पैदा होने के बावजूद संत रहीम ने हिन्दी साहित्य में अद्धभुत योगदान दिया है. उनकी साहित्यक रचनाओं में दोहे प्रमुख़ हैं.



यहाँ संत रहीम के कुछ दोहे संकलित किये गए हैं.

Hindi Dohe by Sant Rahim

1. रहिमन वे नर मरि चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।
उनते पहलेवे मुये, जिन मुख निकसत नाहिं॥

2. रहिमन प्रीति सराहिये, मिले होत रंग दून।
ज्यों हरदी जरदी तजै, तजै सफेदी चून॥

3. अमरबेली बिनु मूल की, प्रतिपलट है ताहि
रहिमन ऐसे प्रभुहि ताजी, खोजत फिरिए कही

4. खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान।
रहिमन दाबे ना दबै, जानत सकल जहान॥

5. वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाँटनवारे के लगे, ज्यों मेहंदी को रंग॥

6. रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गए ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

7. दीबो चहै करतार जिन्हैं सुख, सो तौ 'रहीम टरै नहिं टारे।
उद्यम कोऊ करौ करौ, धन आवत आपहिं हाथ पसारे॥

8. रहिमन गली है सकरी, दूजो नहीं ठहराही
आपु अहै, तो हरि नहीं, हरि तो आपुन नहीं

9. रहिमन प्रीति सराहिये, मिले होत रंग दून
ज्यों जर्दी हरदी तजै, तजै सफेदी चून

10. मान सहित विष खाय कै, सम्भु भये जगदीस।
बिना मान अमृत पिये, राहु कटायो सीस॥

11. धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाई।
    उदधि बडाई कौन है, जगत पियासो जाइ॥

12. जो रहिम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
    चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

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