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संत रहीम की दोहावली का एक संकलन पहले भी प्रकाशित किया जा चुका है. पाठको के आग्रह पर संत रहीम के कुछ नए हिन्दी दोहे यहाँ प्रकाशित किये जा रहे हैं. आशा है आपको यह संकलन भी पसंद आएगा. पाठको की राय आपेक्षित है.



Sant Rahim Hindi Dohe

1. जेहि रहीम मन आपनो कीन्हो चारू चकोर
नीसी-बसर लाग्यो रहे, कृष्णचंद्रा की ओर

2. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडो चटकाय
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ पड़ जाये

3. जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।
रहिमन मछरी नीर को, तऊ छाँडत छोह॥

4. कमला थिर रहीम कहि, यह जानत सब कोय।
पुरुष पुरातन की बधू, क्यों चंचला होय॥

5. देव हँसैं सब आपसु में, बिधि के परपंच जाहिं निहारे।
बेटा भयो बसुदेव के धाम, दुंदुभी बाजत नंद के द्वारे॥

6. धूर धरत नित शीश पर, कहु रहीम किहिं काज।
जिहि रज मुनि पतनी तरी, सो ढूँढत गजराज॥

7. प्रीतम च्छबी नैनन बसी, पर-च्छबी कहा समाय
भरी सराय रहींम लखि, पथिक आप फिर जाय

8. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं पान।
कहि रहीम पर काज हित, सम्पति सुचहिं सुजान॥

9. क्षमा बडन को चाहिए, छोटन को उतपात।
का रहीम हरि को घटयो, जो भृगु मारी लात॥

10. नैन सलोने अधर मधु, कहि रहीम घटि कौन।
मीठो भावै लोन पर, अरु मीठे पर लौन॥

11. रहिमन पैदा प्रेम को, निपट सिलसिली गैल 
बीलछत  पाव पिपीलिको, लोग लड़ावत बैल

12. धनी रहीम गति मीन की, जल बिच्छुरत जिय जाय
जियत कंज तजि अनत बसी, कहा भौर को भय

13. टूटे सुजन मनाइए, जो टूटैं सौ बार।
रहिमन फिरि-फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार॥

पूर्व प्रकाशित संकलन: संत रहीम के हिन्दी दोहे

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