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Swami Ramdev Famous Hindi Quotes - Inspiring Sayings



1. प्रत्येक जीव की आत्मा में मेरा परमात्मा विराजमान है. -स्वामी रामदेव

2. मैं पुरुषार्थवादी, राष्ट्र्वादी, मानवतावादी अध्यात्मवादी हूँ. -स्वामी रामदेव

3. मैं परमात्मा का प्रतिनिधि हूँ. -स्वामी रामदेव

4. मैं सदा प्रभु में हूँ, मेरा प्रभु सदा मुझमें है. -स्वामी रामदेव

5. पराक्रमशीलता, राष्ट्रवादिता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, आध्यात्मिक, मानवता एवं विनयशीलता मेरी कार्यशैली के आदर्श हैं. -स्वामी रामदेव

6. बाह्य जगत में प्रसिध्दि की तीव्र लालसा का अर्थ है-तुम्हें आन्तरिक सम्रध्द शान्ति उपलब्ध नहीं हो पाई है. -स्वामी रामदेव

7. द्रढता हो, जिद्द नहीं. बहादुरी हो, जल्दबाजी नहीं. दया हो, कमजोरी नहीं. -स्वामी रामदेव

8. सदा चेहरे पर प्रसन्नता मुस्कान रखो. दूसरों को प्रसन्नता दो, तुम्हें प्रसन्नता मिलेगी. -स्वामी रामदेव

9. इन्सान का जन्म ही, दर्द एवं पीडा के साथ होता है. अत: जीवन भर जीवन में काँटे रहेंगे. उन काँटों के बीच तुम्हें गुलाब के फूलों की तरह, अपने जीवन-पुष्प को विकसित करना है. -स्वामी रामदेव

10. निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, कर्तृत्व के अहंकार का अभाव होता है. -स्वामी रामदेव

11. ध्यान-उपासना के द्वारा जब तुम ईश्वरीय शक्तियों के संवाहक बन जाते हो तब तुम्हें निमित्त बनाकर भागवत शक्ति कार्य कर रही होती है. -स्वामी रामदेव

12. मेरे भीतर संकल्प की अग्नि निरंतर प्रज्ज्वलित है. मेरे जीवन का पथ सदा प्रकाशमान है. -स्वामी रामदेव

13. मैं मात्र एक व्यक्ति नहीं, अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र व देश की सभ्यता व संस्कृति की भिव्यक्ति हूँ. -स्वामी रामदेव

14. ज्ञान का अर्थ मात्र जानना नहीं, वैसा हो जाना है. -स्वामी रामदेव

15. कर्म ही मेरा धर्म है. कर्म ही मेरि पूजा है. -स्वामी रामदेव

16. मैं अपने जीवन पुष्प से माँ भारती की आराधना करुँगा. -स्वामी रामदेव

17. मैं पहले माँ भारती का पुत्र हूँ बाद में सन्यासी, ग्रहस्थी, नेता अभिनेता, कर्मचारी, अधिकारी या व्यापारी हूँ. -स्वामी रामदेव

18. अपनी आन्तरिक क्षमताओं का पूरा उपयोग करें तो हम पुरुष से महापुरुष, युगपुरुष, मानव से महामानव बन सकते हैं. -स्वामी रामदेव

19. इदं राष्ट्राय इदन्न मम मेरा यह जीवन राष्ट्र के लिए है. -स्वामी रामदेव

20. मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैंने इस पवित्र भूमि देश में जन्म लिया है. -स्वामी रामदेव

21. मैं माँ भारती का अम्रतपुत्र हूँ, “माता भूमि: पुत्रोहं प्रथिव्या:”. -स्वामी रामदेव

22. जीवन को छोटे उद्देश्यों के लिए जीना जीवन का अपमान है. -स्वामी रामदेव

23.  जब मेरा अन्तर्जागरण हुआ तो मैंने स्वयं को संबोधि व्रक्ष की छाया में पूर्ण त्रप्त पाया. -स्वामी रामदेव

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