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Swine Flu एक गम्भीर बीमारी है जो वायरस फैलने से होता है. ये बीमारी स्वाइन फ्लू श्वसन संस्थान (रेस्पिरेटरी सिस्टम ) से सम्बंधित है. Swine Flu H1 H1  नामक वायरस के फैलने से होती है और इसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं. बहुत से NGO's और सरकार भी इस बीमारी के प्रसार से चिंतित है. आइये हम आपको स्वाइन फ्लू के लक्षण (Symptoms) बताते हैं.



Symptoms of Swine Flu 

1. अगर रोगी को लगातार बुखार हो.
2. लगातार नाक बहता हो.
3. गले में असमान्य खराश हो.
4. लगातार छींके आ रही हो.
5. तेज़ सरदर्द हो.
6. अत्यधिक थकान महसूस होती हो.

अगर ये सब लक्षण महसूस हो तो ये स्वाइन फ्लू का कारण हो सकते हैं. कहते हैं, Prevention is better than cure. रोग से बचाव ही रोग का सबसे उत्तम इलाज़ है.

कृपया ध्यान दे:
छोटे बच्चो, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गो को स्वाइन फ्लू के लक्षणों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
Prevention from Swine Flu ( बचाव एवं उपचार):
1. छींके या खांसी आये तो रुमाल के प्रयोग करे. आप टिशू पेपर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
2. खुद की स्वछता का ध्यान खुद रखे. कहते हैं स्वछता में भगवन वास करते हैं. खाना खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने की आदत डालें. संक्रमण से बचाव सौ रोगों का इलाज़ है.
3. भीड़ भाड़ वाली सब जगह जैसे शादी समारोह, पार्टी, मेले इत्यादि में संक्रमण से बचे. बात करते समय उचित दूरी रखे और मास्क का इस्तेमाल करें.
4. खांसी और जुकाम से पीड़ित व्यक्तियों से परहेज करे और दूरी बना के रखे.
5. अधिकतम पानी पिए और उचित आराम करें.
घरेलु आयुर्वेदिक इलाज़
1. सर्दी, जुकाम, खांसी एवं फ्लू में काढ़ा सेवन करे. यह स्वाइन फ्लू में भी उपयोगी है.
2. गरम दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर पीना बहुत लाभकारक है.
3. काली मिर्च, तुलसी, लौंग एवं अदरक की चाय भी सर्दी, खांसी और फ्लू में बहुत लाभकारी है.
4. आयुर्वेदिक दवाएं जैसे लक्ष्मी विलास रस, सितोपलादि चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण , अभ्रक भस्म, संजीवनी वटी आदि का सेवन फायदेमंद रहता है.
5. लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सिक से संपर्क में रहे.


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