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Hindi Father Kavita, Poem on Father's Day

Hindi Father Poem

मेरे पापा
मेरी भी इक माँ है प्यारी,
सारे जग से न्यारी न्यारी,
पराया दर्द बांटने को आतुर,
पौष्टिक आहार बनाने में चातुर,
इसके लिए डांट है खाती,
फिर भी वह बाज़ न आती,
सबके दुख सुख की नाती,
पापा को है न सुहाती,

पापा भी लगते हैं प्यारे,
पर माँ जैसे न हमें दुलारे,
पापा मेरे कोई काम तो नहीं हैं,
माँ जैसा पर दम तो नहीं है,
पापा के लिए एक ही ग़म,
बोले ज्यादा सोचे कम,
थोड़े थोड़े गुस्से वाले,
थोड़े मस्त थोड़े मतवाले,
खाना दो तो थाली पटके,
दवा दो तो हाथ वह झटके,
बेटो के लिए गरम,
बहुओं के लिए नरम,
माँ को डांटे हरदम,
काश ! पापा भी माँ जैसे हो जाये,
तो हमारा परिवार धन्य हो जाये!

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