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आधुनिकता हिन्दी कविता: Hindi Poem, Kavita

Hindi Kavita Poem


माँ का आंचल अब, पुरानी सी बात हो गई,
कुत्तो के साथ घूमना फैशन की बात हो गई.

शर्म - हया सब, बाजारों में बिकाऊ हो गई,
गौ माता आजकल के दौर में काऊ हो गई.

माता-पिता लगे बोझ, रिश्तों में होड़ हो गई,
युवा नशे में लिप्त, मयखानें में दौड़ हो गई.

कपड़े तंग तो जुबान की शैली, बेढंग हो गई,
मर्यादा भूल नारी, अश्लीलता के संग हो गई.


माँ, बहन, बेटी, पत्नी, वाह क्या माल हो गई,
प्यार के नाम पे नारी, हवस की ढाल हो गई.


माँ - मम्मी, पिता -डेड तो बहन सीस हो गई,
युवा पीढ़ी संस्कार में, टाय-टाय फीस हो गई.


मातृभाषा हिन्दी छोड़, अंग्रेजी प्रमुख हो गई,
संतों की वाणी छोड़, गालियां श्रीमुख हो गई.


नैतिकता की बात , गुजरी रात हो गई,
बड़ो का आदर करना, शर्म की बात हो गई.




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