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Sacchi Mohabbat Hindi Poem

Sacchi Mohabbat Hindi Poem Kavita


ये कैसी अजीब सी दुनिया
बना दी तूने ऐ मेरे मौला
सच्च पे रिश्ता बनता नही
झूठ पे रिश्ता टिकता नही
बनते हैं रिश्ते आज वहां
जहाँ अपनापन मिलता नही
प्रेम, स्नेह भरपूर हो जहाँ
उसे अपना कोई दिखता नही
जो करते है मीठी-मीठी बातें
उसे छोड़कर कोई जाता नही
जो दिखाएँ सच्च का आईना
उसके संग कोई रहता नही
अपनापन ढूंढ रहे सब यहाँ
हकीकत में कोई मिलता नही
ज्ञानी महात्मा फिरते सब यहाँ
बुनियादी बात कोई करता नही
पैसे और हवस के अंधकार में
दो कदम साथ कोई चलता नही
बड़ा अजीब हैं ये युग मेरे भाई
सच्ची मोहब्बत कोई करता नही...

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