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Sai Baba Hindi Kavita, Poem on Shirdi Sai Baba

Sai Baba Hindi Kavita, Poem on Shirdi Sai Baba

एक कफनी में जीवन बिताया
कौड़ी को भी हृदय से लगाया
मांग के भिक्षा साँईं ने टमरेल में
सभी भक्तों के कष्टों को मिटाया

बगल में सटका हाथ में बाटा
साँईं मांगे पाँच घरों से आटा
खुद खाते थे एक ही निवाला
बाकि सब कुछ भक्तों में बांटा


आओ साई से हम दुआ मांगे
जिदंगी जीने की अदा मांगे
अपनी खातिर तो बहुत मांगा है
आज सब के लिए भला मांगे।

 "एक तू ही भरोसा... एक तू ही सहारा...
इस तेरे जहां में... नहीं कोई हमारा...
ईश्वर अल्लाह यह पुकार सुन ले...
हे ईश्वर या अल्लाह हे दाता"...

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